श्री गणेश चालीसा
Shri Ganesh Chalisa · Ramsundar
भगवान गणेश की स्तुति — शुरुआत में एक दोहा, अड़तीस चौपाइयाँ और अंत में दो दोहे। नीचे पूरा पाठ बड़े, साफ़ अक्षरों में है। भाषा चुनकर इसे अंग्रेज़ी, मराठी, गुजराती, बंगाली या ओड़िया में भी पढ़ सकते हैं।
दोहा
- 1
जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल।विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
चौपाई
- 1
जय जय जय गणपति गणराजू।मंगल भरण करण शुभ काजू॥
- 2
जय गजबदन सदन सुखदाता।विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
- 3
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
- 4
राजित मणि मुक्तन उर माला।स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
- 5
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
- 6
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।चरण पादुका मुनि मन राजित॥
- 7
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।गौरी ललन विश्व-विख्याता॥
- 8
ऋद्धि सिद्धि तव चँवर सुधारे।मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
- 9
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।अति शुचि पावन मंगल कारी॥
- 10
एक समय गिरिराज कुमारी।पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
- 11
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।तब पहुँच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥
- 12
अतिथि जानि कै गौरी सुखारी।बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥
- 13
अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा।मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
- 14
मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला।बिना गर्भ धारण यहि काला॥
- 15
गणनायक गुण ज्ञान निधाना।पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
- 16
अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै।पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥
- 17
बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना।लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥
- 18
सकल मगन सुख मंगल गावहिं।नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥
- 19
शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं।सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥
- 20
लखि अति आनन्द मंगल साजा।देखन भी आए शनि राजा॥
- 21
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।बालक देखन चाहत नाहीं॥
- 22
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥
- 23
कहन लगे शनि मन सकुचाई।का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥
- 24
नहिं विश्वास उमा उर भयऊ।शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥
- 25
पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।बालक शिर उड़ि गयो अकाशा॥
- 26
गिरिजा गिरीं विकल ह्वै धरणी।सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥
- 27
हाहाकार मच्यो कैलाशा।शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥
- 28
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए।काटि चक्र सो गज शिर लाए॥
- 29
बालक के धड़ ऊपर धारयो।प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
- 30
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥
- 31
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
- 32
चले षडानन भरमि भुलाई।रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
- 33
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
- 34
धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
- 35
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहस मुख सकै न गाई॥
- 36
मैं मति हीन मलीन दुखारी।करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥
- 37
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।जग प्रयाग ककरा दुर्वासा॥
- 38
अब प्रभु दया दीन पर कीजै।अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
दोहा
पाठ गिनती
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गणेश चालीसा क्या है?
गणेश चालीसा भगवान गणेश की स्तुति है, जिसमें उनके रूप, जन्म की कथा और महिमा का वर्णन है। इसकी भाषा अवधी से मिलती-जुलती हिंदी है। चालीसा की एक चौपाई में रचनाकार का नाम आता है — ‘भजत रामसुन्दर प्रभुदासा’ — इसलिए इसे रामसुन्दर की रचना माना जाता है।
प्रचलित पाठ में शुरुआत में एक दोहा, फिर अड़तीस चौपाइयाँ और अंत में दो दोहे हैं। ‘चालीसा’ नाम परंपरा से चला आ रहा है, भले ही इस पाठ में चौपाइयों की संख्या चालीस से कम है।
चालीसा में गणेश जी की कथा
चौपाइयों में गणेश जी के जन्म की कथा क्रम से आती है: माता पार्वती का पुत्र के लिए तप, गणेश जी का बालक रूप में प्रकट होना, शनि देव की दृष्टि पड़ने से बालक का सिर उड़ जाना, भगवान विष्णु का हाथी का सिर लाना, और शिव जी द्वारा उन्हें ‘गणेश’ नाम और प्रथम पूज्य होने का वरदान।
इसके बाद वह प्रसंग है जिसमें बुद्धि की परीक्षा में कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा को निकल पड़ते हैं, जबकि गणेश जी माता-पिता की सात परिक्रमा करके परीक्षा जीत लेते हैं। इसी से वे बुद्धि के देवता और हर शुभ काम में पहले पूजे जाने वाले माने जाते हैं।
गणेश चालीसा का पाठ कैसे करें
- स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और गणेश जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
- दीपक जलाएँ; दूर्वा, लाल फूल और मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- चाहें तो पहले ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जप करें।
- शुरुआत के दोहे से अंत के दोहों तक पूरा पाठ करें, फिर गणेश जी की आरती करें।
कब और कितनी बार पढ़ें
किसी भी शुभ काम की शुरुआत में गणेश जी का स्मरण करना परंपरा है। बुधवार गणेश जी का दिन माना जाता है, और हर महीने की चतुर्थी, विशेषकर संकष्टी चतुर्थी, तथा गणेश चतुर्थी पर इसका विशेष पाठ होता है।
रोज़ एक बार का पाठ पर्याप्त है। संकल्प के रूप में लोग 11, 21 या 108 पाठ भी करते हैं; गिनती के लिए ऊपर दी गई पाठ गिनती का उपयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश चालीसा किसने लिखी?
चालीसा की एक चौपाई में नाम आता है: ‘भजत रामसुन्दर प्रभुदासा’। इसलिए इसे रामसुन्दर की रचना माना जाता है। अंतिम दोहे के अनुसार यह ऋषि पंचमी के दिन पूरी हुई।
गणेश चालीसा में कितनी चौपाइयाँ हैं?
प्रचलित पाठ में एक दोहा, अड़तीस चौपाइयाँ और समापन के दो दोहे हैं। ‘चालीसा’ नाम परंपरा से चला आ रहा है।
गणेश चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
कभी भी, विशेषकर किसी काम की शुरुआत में। बुधवार, संकष्टी और विनायक चतुर्थी, और गणेश चतुर्थी पर इसका विशेष महत्व माना जाता है।
गणेश चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
एक बार का पूरा पाठ पर्याप्त है। संकल्प लेकर लोग 11, 21 या 108 पाठ भी करते हैं।
गणेश चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है?
भक्तों की मान्यता है कि इससे काम में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और बुद्धि व एकाग्रता बढ़ती है। चालीसा स्वयं कहती है: ‘नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान’। यह आस्था का विषय है।
क्या बच्चे गणेश चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ। गणेश जी बुद्धि और विद्या के देवता माने जाते हैं, इसलिए कई परिवार बच्चों से पढ़ाई शुरू करने से पहले इसका पाठ करवाते हैं।
गणेश जी को क्या चढ़ाएँ?
दूर्वा (दूब घास), लाल फूल, सिंदूर, और मोदक या बूँदी के लड्डू। परंपरा में गणेश पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।
गणेश चालीसा के बाद क्या करें?
पाठ के बाद गणेश जी की आरती ‘जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा’ करें और प्रसाद बाँटें।
क्या गणेश चालीसा English या दूसरी लिपि में पढ़ सकते हैं?
हाँ। भाषा सूची में English, मराठी, गुजराती, बंगाली या ओड़िया चुनें। शब्द वही रहते हैं, केवल लिपि बदलती है, और आप जिस चौपाई पर थे वहीं पहुँचते हैं।
यह पाठ कई प्रकाशित स्रोतों से शब्दशः मिलाकर जाँचा गया है। कोई त्रुटि दिखे तो हमें बताएँ।